श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.48.6 
किमर्थं च नरश्रेष्ठौ सम्प्राप्तौ दुर्गमे पथि।
वरायुधधरौ वीरौ श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'ये दोनों वीर पुरुष उत्तम अस्त्र-शस्त्र धारण करके इस कठिन मार्ग पर क्यों आये हैं? मैं यह सुनना चाहता हूँ। 6॥
 
'Why have these two brave men, wielding the best weapons, come on this difficult path? I really want to hear this. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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