श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.48.5 
भूषयन्ताविमं देशं चन्द्रसूर्याविवाम्बरम्।
परस्परेण सदृशौ प्रमाणेङ्गितचेष्टितै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जैसे चन्द्रमा और सूर्य आकाश की शोभा बढ़ाते हैं, वैसे ही ये दोनों राजकुमार इस देश की शोभा बढ़ा रहे हैं। शरीर की ऊँचाई, भावों की सूचक मुद्राएँ और हाव-भाव (वाणी) में ये दोनों एक-दूसरे के समान हैं॥5॥
 
‘Just as the moon and the sun enhance the beauty of the sky, similarly these two princes are beautifying this country. In height of body, gestures indicative of emotions and gestures (speech) both of them are similar to each other.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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