श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.48.4 
यदृच्छयैव गां प्राप्तौ देवलोकादिवामरौ।
कथं पद‍्भ्यामिह प्राप्तौ किमर्थं कस्य वा मुने॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो देवताओं के दो पुत्र दैवी इच्छा से स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गए हों। मुनि! ये दोनों किसके पुत्र हैं और कैसे और क्यों पैदल चलकर यहाँ आए हैं?॥4॥
 
‘Looking at them it seems as if two sons of the gods have come to earth from heaven by divine will. Muni! Whose sons are these two and how and why have they come here on foot?॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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