श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.48.28 
गौतमेनैवमुक्तस्य सुरोषेण महात्मना।
पेततुर्वृषणौ भूमौ सहस्राक्षस्य तत्क्षणात्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'क्रोध में भरे हुए महात्मा गौतम ने ज्यों ही यह कहा, उसी समय सहस्राक्ष इन्द्र के दोनों अण्डज पृथ्वी पर गिर पड़े ॥28॥
 
'As soon as Mahatma Gautam, filled with anger, said this, both the testicles of Sahasraksh Indra fell on the earth at that very moment. 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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