'उसे देखते ही देवराज इन्द्र भय से काँप उठे। उनका मुख विषाद से भर गया। दुष्ट इन्द्र को मुनि वेश में देखकर धर्मात्मा गौतम मुनि ने क्रोधपूर्वक कहा-॥25-26॥
‘As soon as he saw him, Devraj Indra trembled with fear. His face was filled with sadness. Seeing the wicked Indra in the guise of a sage, the virtuous sage Gautama said in anger -॥ 25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥