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श्लोक 1.48.21-22h  |
इन्द्रस्तु प्रहसन् वाक्यमहल्यामिदमब्रवीत्॥ २१॥
सुश्रोणि परितुष्टोऽस्मि गमिष्यामि यथागतम्। |
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| अनुवाद |
| तब इन्द्र ने हँसकर अहिल्या से कहा- 'सुन्दरी! मैं भी संतुष्ट हूँ। अब मैं जिस मार्ग से आया था, उसी मार्ग से वापस जाऊँगा।'॥21 1/2॥ |
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| ‘Then Indra smilingly said to Ahalya- ‘Beautiful lady! I am also satisfied. Now I will go back the same way I came.’॥ 21 1/2॥ |
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