श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  1.48.21-22h 
इन्द्रस्तु प्रहसन् वाक्यमहल्यामिदमब्रवीत्॥ २१॥
सुश्रोणि परितुष्टोऽस्मि गमिष्यामि यथागतम्।
 
 
अनुवाद
तब इन्द्र ने हँसकर अहिल्या से कहा- 'सुन्दरी! मैं भी संतुष्ट हूँ। अब मैं जिस मार्ग से आया था, उसी मार्ग से वापस जाऊँगा।'॥21 1/2॥
 
‘Then Indra smilingly said to Ahalya- ‘Beautiful lady! I am also satisfied. Now I will go back the same way I came.’॥ 21 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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