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ramayan 1.48.19: 'रघुनंदन! महर्षि गौतम के वेश में आये हुए इन्द्र को पहचानकर भी उस मूर्खा स्त्री ने कहा 'अरे! देवराज इन्द्र मुझे चाहते हैं, यह जिज्ञासावश मैंने उनसे मिलने का निश्चय किया और प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।'   |   ramayan सर्ग 1.48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.48.19 
मुनिवेषं सहस्राक्षं विज्ञाय रघुनन्दन।
मतिं चकार दुर्मेधा देवराजकुतूहलात्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! महर्षि गौतम के वेश में आये हुए इन्द्र को पहचानकर भी उस मूर्खा स्त्री ने कहा 'अरे! देवराज इन्द्र मुझे चाहते हैं, यह जिज्ञासावश मैंने उनसे मिलने का निश्चय किया और प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।'
 
'Ragunandan! Even after recognizing Indra who had come in the guise of Maharishi Gautam, that foolish woman said 'Oh! Due to curiosity, Devraj Indra wants me and decided to meet him and accepted the proposal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)