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ramayan 1.48.18: हे सदा सावधान रहने वाली सुन्दरी! काम-इच्छा रखने वाले पुरुष रजस्वला होने की प्रतीक्षा नहीं करते। हे सुन्दर कमर वाली सुन्दरी! मैं (इन्द्र) तुम्हारे साथ समागम करना चाहता हूँ। ॥18॥   |   ramayan सर्ग 1.48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.48.18 
ऋतुकालं प्रतीक्षन्ते नार्थिन: सुसमाहिते।
संगमं त्वहमिच्छामि त्वया सह सुमध्यमे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे सदा सावधान रहने वाली सुन्दरी! काम-इच्छा रखने वाले पुरुष रजस्वला होने की प्रतीक्षा नहीं करते। हे सुन्दर कमर वाली सुन्दरी! मैं (इन्द्र) तुम्हारे साथ समागम करना चाहता हूँ। ॥18॥
 
"Beautiful lady who is always cautious! Men who desire sex do not wait for the period of menstruation. Beautiful lady with beautiful waist! I (Indra) want to have intercourse with you." ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)