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ramayan 1.48.16: हे प्रतापी राजकुमार! पूर्वकाल में महर्षि गौतम अपनी पत्नी अहिल्या के साथ यहाँ तपस्या करते थे। उन्होंने यहाँ अनेक वर्षों तक तपस्या की थी॥16॥   |   ramayan सर्ग 1.48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.48.16 
स चात्र तप आतिष्ठदहल्यासहित: पुरा।
वर्षपूगान्यनेकानि राजपुत्र महायश:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रतापी राजकुमार! पूर्वकाल में महर्षि गौतम अपनी पत्नी अहिल्या के साथ यहाँ तपस्या करते थे। उन्होंने यहाँ अनेक वर्षों तक तपस्या की थी॥16॥
 
‘O glorious prince! In the past, Maharishi Gautama used to perform penance here along with his wife Ahalya. He performed penance here for many years.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)