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ramayan 1.47.7-8h: दितिका के उन वचनों को सुनकर बल दैत्यों का वध करने वाले सहस्राक्ष इन्द्र ने हाथ जोड़कर यह कहा -॥7 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  1.47.7-8h 
तस्यास्तद् वचनं श्रुत्वा सहस्राक्ष: पुरंदर:॥ ७॥
उवाच प्राञ्जलिर्वाक्यमतीदं बलसूदन:।
 
 
अनुवाद
दितिका के उन वचनों को सुनकर बल दैत्यों का वध करने वाले सहस्राक्ष इन्द्र ने हाथ जोड़कर यह कहा -॥7 1/2॥
 
Ditika, upon hearing those words, Sahasraaksha Indra, the slayer of the demon Bala, said this with folded hands -॥ 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)