Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.47.22: 'मुनि! मैं धन्य हूँ। आपने मुझ पर बड़ी कृपा की है; क्योंकि आप स्वयं मेरे राज्य में पधारे और मुझे दर्शन दिए। इस समय मुझसे बढ़कर कोई धन्य नहीं है।'॥22॥ | ramayan सर्ग 1.47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'मुनि! मैं धन्य हूँ। आपने मुझ पर बड़ी कृपा की है; क्योंकि आप स्वयं मेरे राज्य में पधारे और मुझे दर्शन दिए। इस समय मुझसे बढ़कर कोई धन्य नहीं है।'॥22॥
‘Muni! I am blessed. You have bestowed great favour on me; because you yourself came to my kingdom and gave me darshan. At this time there is no one more blessed than me.'॥ 22॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे सप्तचत्वारिंश: सर्ग:॥ ४७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें सैंतालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥