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ramayan 1.47.2: ‘देवेश! बलसूदन! मेरी भूल से यह गर्भ सात टुकड़ों में विभक्त हो गया है। इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 1.47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.47.2 
ममापराधाद् गर्भोऽयं सप्तधा शकलीकृत:।
नापराधो हि देवेश तवात्र बलसूदन॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘देवेश! बलसूदन! मेरी भूल से यह गर्भ सात टुकड़ों में विभक्त हो गया है। इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है॥ 2॥
 
‘Devesh! Balsudan! Due to my mistake this womb has been split into seven pieces. You are not at fault in this.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)