श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.47.19 
इहाद्य रजनीमेकां सुखं स्वप्स्यामहे वयम्।
श्व: प्रभाते नरश्रेष्ठ जनकं द्रष्टुमर्हसि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! आज रात हम लोग यहीं सुखपूर्वक सोएंगे; फिर कल प्रातःकाल तुम यहां से प्रस्थान करके राजा जनक से मिलने मिथिला चले जाना।
 
O best of men! Tonight we will sleep here comfortably; then tomorrow morning you will leave from here and go to Mithila to meet King Janaka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)