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ramayan 1.47.16: कुशश्व के अत्यंत पराक्रमी पुत्र प्रतापी सोमदत्त हुए और सोमदत्त के पुत्र ककुत्स्थ नाम से प्रसिद्ध हुए।   |   ramayan सर्ग 1.47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.47.16 
कुशाश्वस्य महातेजा: सोमदत्त: प्रतापवान्।
सोमदत्तस्य पुत्रस्तु काकुत्स्थ इति विश्रुत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कुशश्व के अत्यंत पराक्रमी पुत्र प्रतापी सोमदत्त हुए और सोमदत्त के पुत्र ककुत्स्थ नाम से प्रसिद्ध हुए।
 
Kushaswa's very powerful son was the majestic Somadatt, and Somadatt's son became famous by the name of Kakutstha. 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)