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ramayan 1.47.1: इन्द्र द्वारा अपने गर्भ को सात टुकड़ों में तोड़ देने पर देवी दिति को बड़ा दुःख हुआ। उन्होंने वीर सहस्राक्ष इन्द्र से विनती की - 1॥   |   ramayan सर्ग 1.47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  1.47.1 
सप्तधा तु कृते गर्भे दिति: परमदु:खिता।
सहस्राक्षं दुराधर्षं वाक्यं सानुनयाब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र द्वारा अपने गर्भ को सात टुकड़ों में तोड़ देने पर देवी दिति को बड़ा दुःख हुआ। उन्होंने वीर सहस्राक्ष इन्द्र से विनती की - 1॥
 
Goddess Diti felt very sad when her womb was broken into seven pieces by Indra. She pleaded with the brave Sahasraksh Indra - 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)