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ramayan 1.45.7: 'पुण्यकर्म में तत्पर रहने वाले ऋषियों की यह नाव यहाँ उपस्थित है। इस पर सुखदायक आसन बिछे हुए हैं। परम पूज्य महर्षि, आपको यहाँ उपस्थित जानकर ऋषियों द्वारा भेजी गई यह नाव अत्यन्त तीव्र गति से यहाँ आई है।'॥7॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.45.7 
नौरेषा हि सुखास्तीर्णा ऋषीणां पुण्यकर्मणाम्।
भगवन्तमिह प्राप्तं ज्ञात्वा त्वरितमागता॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'पुण्यकर्म में तत्पर रहने वाले ऋषियों की यह नाव यहाँ उपस्थित है। इस पर सुखदायक आसन बिछे हुए हैं। परम पूज्य महर्षि, आपको यहाँ उपस्थित जानकर ऋषियों द्वारा भेजी गई यह नाव अत्यन्त तीव्र गति से यहाँ आई है।'॥7॥
 
‘This boat of the sages who are always ready to perform pious deeds is present here. Comfortable seats are spread on it. Knowing that you, the most revered Maharshi, are present here, this boat sent by the sages has come here at a very fast speed.'॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)