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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.45.37 
दिते: पुत्रा न तां राम जगृहुर्वरुणात्मजाम्।
अदितेस्तु सुता वीर जगृहुस्तामनिन्दिताम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'वीर श्री राम! वरुण की पुत्री सुरा को दैत्यों ने स्वीकार नहीं किया, किन्तु अदिति के पुत्रों ने इस अवर्णनीय सुन्दरी को स्वीकार कर लिया।
 
'Valiant Shri Ram! The demons did not accept Varun's daughter Sura, but Aditi's sons accepted this indescribably beautiful lady.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)