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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.45.36 
वरुणस्य तत: कन्या वारुणी रघुनन्दन।
उत्पपात महाभागा मार्गमाणा परिग्रहम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'रघुनन्दन! तत्पश्चात वरुण की पुत्री वारुणी, जो सुर की अभिमानी देवी थी, प्रकट हुई और ऐसे पुरुष की खोज करने लगी जो उसे स्वीकार करे॥36॥
 
'Ragunandan! Thereafter Varun's daughter Varuni, who was the proud goddess of Sura, appeared and started searching for a man who would accept her. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)