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ramayan 1.45.35: ‘देवता और दानवों में से कोई भी उन अप्सराओं को अपनी पत्नी रूप में स्वीकार नहीं कर सकता था; इसलिए वे साधारण (साधारण) मानी जाती थीं।॥ 35॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.45.35 
न ता: स्म प्रतिगृह्णन्ति सर्वे ते देवदानवा:।
अप्रतिग्रहणादेव ता वै साधारणा: स्मृता:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
‘देवता और दानवों में से कोई भी उन अप्सराओं को अपनी पत्नी रूप में स्वीकार नहीं कर सकता था; इसलिए वे साधारण (साधारण) मानी जाती थीं।॥ 35॥
 
‘None of the gods and demons could accept those Apsaras as their wives; therefore they were considered ordinary (ordinary).॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)