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ramayan 1.45.21: 'यह देखकर देवतागण सबका कल्याण करने वाले महान् देवता पशुपति रुद्र की शरण में गए और व्याकुल होकर रोते हुए उनकी स्तुति करने लगे॥21॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.45.21 
अथ देवा महादेवं शङ्करं शरणार्थिन:।
जग्मु: पशुपतिं रुद्रं त्राहि त्राहीति तुष्टुवु:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'यह देखकर देवतागण सबका कल्याण करने वाले महान् देवता पशुपति रुद्र की शरण में गए और व्याकुल होकर रोते हुए उनकी स्तुति करने लगे॥21॥
 
'Seeing this, the gods took refuge in Pashupati Rudra, the great god who provides welfare to all, and started praising him by crying out in distress. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)