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ramayan 1.45.2: 'ब्रह्मन्! आपने गंगाजी के स्वर्ग से उतरकर सागर में भरने की यह बड़ी ही अद्भुत एवं अद्भुत कथा कही। 2॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.45.2 
अत्यद्भुतमिदं ब्रह्मन् कथितं परमं त्वया।
गंगावतरणं पुण्यं सागरस्यापि पूरणम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
'ब्रह्मन्! आपने गंगाजी के स्वर्ग से उतरकर सागर में भरने की यह बड़ी ही अद्भुत एवं अद्भुत कथा कही। 2॥
 
'Brahman! You told this very wonderful and wonderful story of Ganga ji descending from heaven and filling the ocean. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)