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ramayan 1.45.14: 'रघुकुलनन्दन श्री राम! सुनो, मैंने विशाला-पुरी की महिमा का वर्णन करते हुए जो कथा इन्द्र से सुनी है, वह मैं तुमसे कहता हूँ। इस देश में जो कुछ घटित हुआ है, उसकी सच्ची कथा सुनो। 14॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.45.14 
श्रूयतां राम शक्रस्य कथां कथयत: श्रुताम्।
अस्मिन् देशे हि यद् वृत्तं शृणु तत्त्वेन राघव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'रघुकुलनन्दन श्री राम! सुनो, मैंने विशाला-पुरी की महिमा का वर्णन करते हुए जो कथा इन्द्र से सुनी है, वह मैं तुमसे कहता हूँ। इस देश में जो कुछ घटित हुआ है, उसकी सच्ची कथा सुनो। 14॥
 
'Raghukulnandan Shri Ram! Listen, I am telling you the story that I have heard from Indra describing the glory of Vishala-Puri. Listen to the true story of what has happened in this country. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)