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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.44.7 
पितामहानां सर्वेषां त्वमत्र मनुजाधिप।
कुरुष्व सलिलं राजन् प्रतिज्ञामपवर्जय॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! महाराज! अब आप यहाँ गंगाजी के जल से अपने समस्त पितरों का तर्पण करें और इस प्रकार अपने तथा अपने पूर्वजों द्वारा की गई प्रतिज्ञा को पूर्ण करें॥ 7॥
 
'O Lord of men! Maharaj! Now you should perform the tarpan of all your forefathers here with the water of river Ganga and thus fulfil the promise made by you and your forefathers.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)