Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.44.19: रघुनन्दन! अपने राजा को पुनः देखकर प्रजाजन बहुत प्रसन्न हुए। सबके शोक दूर हो गए। सबकी मनोकामनाएँ पूर्ण हो गईं और उनकी चिंताएँ दूर हो गईं॥19॥ | ramayan सर्ग 1.44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रमुमोद च लोकस्तं नृपमासाद्य राघव।
नष्टशोक: समृद्धार्थो बभूव विगतज्वर:॥ १९॥
अनुवाद
रघुनन्दन! अपने राजा को पुनः देखकर प्रजाजन बहुत प्रसन्न हुए। सबके शोक दूर हो गए। सबकी मनोकामनाएँ पूर्ण हो गईं और उनकी चिंताएँ दूर हो गईं॥19॥
Raghunandan! The people were very happy to see their king again. Everyone's grief vanished. Everyone's wishes were fulfilled and their worries were dispelled.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥