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ramayan 1.41.2: ‘पुत्र! तुम अपने पूर्वजों के समान वीर, विद्वान और यशस्वी हो। तुम भी अपने चाचाओं के मार्ग पर चलो और उस चोर का पता लगाओ जिसने मेरे यज्ञ के घोड़े का अपहरण किया है।॥2॥   |   ramayan सर्ग 1.41: सगर की आज्ञा से अंशुमान् का रसातल में जाकर घोड़े को ले आना और अपने चाचाओं के निधन का समाचार सुनाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 41: सगर की आज्ञा से अंशुमान् का रसातल में जाकर घोड़े को ले आना और अपने चाचाओं के निधन का समाचार सुनाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.41.2 
शूरश्च कृतविद्यश्च पूर्वैस्तुल्योऽसि तेजसा।
पितॄणां गतिमन्विच्छ येन चाश्वोऽपवाहित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्र! तुम अपने पूर्वजों के समान वीर, विद्वान और यशस्वी हो। तुम भी अपने चाचाओं के मार्ग पर चलो और उस चोर का पता लगाओ जिसने मेरे यज्ञ के घोड़े का अपहरण किया है।॥2॥
 
‘Son! You are brave, learned and as illustrious as your ancestors. You too follow the path of your uncles and find the thief who has kidnapped my sacrificial horse.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)