श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 39: इन्द्र के द्वारा राजा सगर के यज्ञ सम्बन्धी अश्व का अपहरण, सगरपुत्रों द्वारा सारी पृथ्वी का भेदन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.39.19 
शूलैरशनिकल्पैश्च हलैश्चापि सुदारुणै:।
भिद्यमाना वसुमती ननाद रघुनन्दन॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'रघुनन्दन! उस समय पृथ्वी वज्र के समान प्रबल काँटों और अत्यन्त भयंकर हलों से सब ओर से छेदित होने के कारण पीड़ा से चिल्लाने लगी॥19॥
 
'Raghunandan! At that time the earth started crying out in pain as it was being pierced from all sides by thorns as strong as thunderbolts and extremely fierce ploughshares.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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