श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 39: इन्द्र के द्वारा राजा सगर के यज्ञ सम्बन्धी अश्व का अपहरण, सगरपुत्रों द्वारा सारी पृथ्वी का भेदन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.39.17 
ते सर्वे हृष्टमनसो राजपुत्रा महाबला:।
जग्मुर्महीतलं राम पितुर्वचनयन्त्रिता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! पिता की आज्ञा के बंधन से बँधे हुए वे सभी पराक्रमी राजकुमार हृदय में आनन्दित होकर पृथ्वी पर विचरण करने लगे॥17॥
 
'Sriram! Bound by the bond of their father's orders, all those mighty princes started wandering on the earth's surface feeling joy in their hearts. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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