श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 38: राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति तथा यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.38.9 
भाषमाणं महात्मानं राजपुत्र्यौ प्रसाद्य तम्।
ऊचतु: परमप्रीते कृताञ्जलिपुटे तदा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘जब महात्मा भृगु ऐसा कह रहे थे, उस समय दोनों राजकुमारियों (रानियों) ने उन्हें प्रसन्न किया और स्वयं भी अत्यंत प्रसन्न होकर हाथ जोड़कर पूछा-॥9॥
 
‘When Mahatma Bhrigu was saying this, at that time the two princesses (queens) made him happy and themselves also became very happy and asked with folded hands -॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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