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ramayan 1.37.20: उस तेजोमय गर्भ का मल वहाँ टिन और सीसा बन गया। इस प्रकार पृथ्वी पर गिरने पर वह तेज नाना प्रकार की धातुओं के रूप में विकसित हुआ।   |   ramayan सर्ग 1.37: गंगा से कार्तिकेय की उत्पत्ति का प्रसंग   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 37: गंगा से कार्तिकेय की उत्पत्ति का प्रसंग  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.37.20 
मलं तस्याभवत् तत्र त्रपु सीसकमेव च।
तदेतद्धरणीं प्राप्य नानाधातुरवर्धत॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस तेजोमय गर्भ का मल वहाँ टिन और सीसा बन गया। इस प्रकार पृथ्वी पर गिरने पर वह तेज नाना प्रकार की धातुओं के रूप में विकसित हुआ।
 
The waste of that radiant womb became tin and lead there. Thus, on falling on the earth, that brilliance grew in the form of various kinds of metals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)