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ramayan 1.37.14: हे रघुनन्दन! जब अग्निदेव ने उस रुद्र तेज से गंगादेवी का सब ओर से अभिषेक किया, तब गंगाजी के समस्त स्रोत उससे परिपूर्ण हो गए॥14॥   |   ramayan सर्ग 1.37: गंगा से कार्तिकेय की उत्पत्ति का प्रसंग   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 37: गंगा से कार्तिकेय की उत्पत्ति का प्रसंग  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.37.14 
समन्ततस्तदा देवीमभ्यषिञ्चत पावक:।
सर्वस्रोतांसि पूर्णानि गंगाया रघुनन्दन॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे रघुनन्दन! जब अग्निदेव ने उस रुद्र तेज से गंगादेवी का सब ओर से अभिषेक किया, तब गंगाजी के समस्त स्रोत उससे परिपूर्ण हो गए॥14॥
 
O Raghunandan! When Agnidev anointed Gangadevi from all sides with that Rudra radiance, then all the sources of Gangaji became filled with it. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)