Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.36.3: जगत को पवित्र करने वाली गंगा तीन दिशाओं में क्यों बहती है? सब नदियों में श्रेष्ठ गंगा 'त्रिपथगा' नाम से क्यों प्रसिद्ध है?॥3॥   |   ramayan सर्ग 1.36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.36.3 
त्रीन् पथो हेतुना केन प्लावयेल्लोकपावनी।
कथं गंगा त्रिपथगा विश्रुता सरिदुत्तमा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जगत को पवित्र करने वाली गंगा तीन दिशाओं में क्यों बहती है? सब नदियों में श्रेष्ठ गंगा 'त्रिपथगा' नाम से क्यों प्रसिद्ध है?॥3॥
 
‘Why does the Ganga, which purifies the world, flow in three directions? Why is the Ganga, the best of all rivers, famous as ‘Tripathaga’?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)