Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.36.21-22: 'देवताओं! मैंने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से अपने पति के साथ समागम किया था, किन्तु आपने मुझे रोक दिया। अतः अब आप भी अपनी पत्नियों से सन्तान उत्पन्न नहीं कर सकेंगे। आज से आपकी पत्नियाँ सन्तान उत्पन्न नहीं कर सकेंगी - वे सन्तानहीन हो जाएँगी।'॥21-22॥   |   ramayan सर्ग 1.36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  1.36.21-22 
यस्मान्निवारिता चाहं संगता पुत्रकाम्यया॥ २१॥
अपत्यं स्वेषु दारेषु नोत्पादयितुमर्हथ।
अद्यप्रभृति युष्माकमप्रजा: सन्तु पत्नय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'देवताओं! मैंने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से अपने पति के साथ समागम किया था, किन्तु आपने मुझे रोक दिया। अतः अब आप भी अपनी पत्नियों से सन्तान उत्पन्न नहीं कर सकेंगे। आज से आपकी पत्नियाँ सन्तान उत्पन्न नहीं कर सकेंगी - वे सन्तानहीन हो जाएँगी।'॥21-22॥
 
‘Gods! I had intercourse with my husband with the desire to have a son, but you stopped me. Hence, now you too will not be able to produce children from your wives. From today onwards, your wives will not be able to produce children – they will become childless.'॥ 21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)