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ramayan 1.36.2: 'ब्रह्मन्! आपने यह बहुत अच्छी धार्मिक कथा कही। अब गिरिराज हिमवान की ज्येष्ठ पुत्री गंगा का दैव लोक और मनुष्य लोक के साथ सम्बन्ध की कथा विस्तारपूर्वक कहिए; क्योंकि आप विस्तृत कथा जानते हैं। 2॥   |   ramayan सर्ग 1.36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.36.2 
धर्मयुक्तमिदं ब्रह्मन् कथितं परमं त्वया।
दुहितु: शैलराजस्य ज्येष्ठाया वक्तुमर्हसि।
विस्तरं विस्तरज्ञोऽसि दिव्यमानुषसम्भवम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
'ब्रह्मन्! आपने यह बहुत अच्छी धार्मिक कथा कही। अब गिरिराज हिमवान की ज्येष्ठ पुत्री गंगा का दैव लोक और मनुष्य लोक के साथ सम्बन्ध की कथा विस्तारपूर्वक कहिए; क्योंकि आप विस्तृत कथा जानते हैं। 2॥
 
'Brahman! You told this very good religious story. Now narrate in detail the story of Giriraj Himavan's eldest daughter Ganga's relationship with the divine world and the human world; Because you know the detailed story. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)