Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.36.19-20h: 'उसी वन में अग्नि से उत्पन्न कार्तिकेय प्रकट हुए। तत्पश्चात् ऋषियों सहित देवताओं ने अत्यन्त प्रसन्न होकर देवी उमा तथा भगवान शिव की बड़ी भक्तिपूर्वक पूजा की।'   |   ramayan सर्ग 1.36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  1.36.19-20h 
यत्र जातो महातेजा: कार्तिकेयोऽग्निसम्भव:।
अथोमां च शिवं चैव देवा: सर्षिगणास्तथा॥ १९॥
पूजयामासुरत्यर्थं सुप्रीतमनसस्तदा।
 
 
अनुवाद
'उसी वन में अग्नि से उत्पन्न कार्तिकेय प्रकट हुए। तत्पश्चात् ऋषियों सहित देवताओं ने अत्यन्त प्रसन्न होकर देवी उमा तथा भगवान शिव की बड़ी भक्तिपूर्वक पूजा की।'
 
'In the same forest, Kartikeya, born of fire, appeared. Thereafter, the gods along with the sages became very happy and worshiped Goddess Uma and Lord Shiva with great devotion. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)