श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.36.16 
एवमुक्त: सुरपति: प्रमुमोच महाबल:।
तेजसा पृथिवी येन व्याप्ता सगिरिकानना॥ १६॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के ये वचन सुनकर महाबली देवाधिदेव भगवान शिव ने अपना तेज प्रकट किया, जो पर्वतों और वनों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी पर व्याप्त हो गया॥16॥
 
Upon hearing these words of the gods, the mighty lord of gods, Lord Shiva, released his radiance, which pervaded the entire earth, including mountains and forests.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)