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ramayan 1.36.15: उनके ऐसा कहने पर देवताओं ने वृषभादिक ध्वजाधारी भगवान शिव से कहा - 'हे प्रभु! आज आपका जो भी तेज क्रोधपूर्वक गिरेगा, उसे यह पृथ्वी माता सहन करेगी।'॥15॥   |   ramayan सर्ग 1.36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.36.15 
एवमुक्तास्ततो देवा: प्रत्यूचुर्वृषभध्वजम्।
यत्तेज: क्षुभितं ह्यद्य तद्धरा धारयिष्यति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर देवताओं ने वृषभादिक ध्वजाधारी भगवान शिव से कहा - 'हे प्रभु! आज आपका जो भी तेज क्रोधपूर्वक गिरेगा, उसे यह पृथ्वी माता सहन करेगी।'॥15॥
 
On his saying this, the gods said to Lord Shiva, who is carrying the flag of Vrishbhadra - 'O Lord! Today, whatever radiance of yours will fall in anger, this Mother Earth will bear it.'॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)