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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 35: विश्वामित्र आदि का गंगाजी के तट पर रात्रिवास करना, गंगाजी की उत्पत्ति की कथा
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श्लोक 5
श्लोक
1.35.5
एवमुक्तस्तु रामेण विश्वामित्रोऽब्रवीदिदम्।
एष पन्था मयोद्दिष्टो येन यान्ति महर्षय:॥ ५॥
अनुवाद
श्रीराम की यह बात सुनकर विश्वामित्र बोले, 'मैंने पहले ही वह मार्ग निश्चित कर लिया है जिससे महर्षि शोणभद्र नदी को पार करते हैं। यह वही मार्ग है।'
On hearing this from Shri Ram, Visvamitra said, 'I have already decided the route by which the great sages cross the Shonabhadra. This is that route.'
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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