श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 35: विश्वामित्र आदि का गंगाजी के तट पर रात्रिवास करना, गंगाजी की उत्पत्ति की कथा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.35.20 
या चान्या शैलदुहिता कन्याऽऽसीद्रघुनन्दन।
उग्रं सुव्रतमास्थाय तपस्तेपे तपोधना॥ २०॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! गिरिराज की दूसरी पुत्री उमा ने कठोर एवं उत्तम व्रत धारण करके घोर तपस्या आरम्भ की। उसने तपस्या द्वारा धन-संपत्ति एकत्रित की।
 
Raghunandan! The other daughter of Giriraj, Uma, started performing severe penance by observing a strict and excellent fast. She accumulated wealth through penance.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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