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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 35: विश्वामित्र आदि का गंगाजी के तट पर रात्रिवास करना, गंगाजी की उत्पत्ति की कथा
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श्लोक 15
श्लोक
1.35.15
या मेरुदुहिता राम तयोर्माता सुमध्यमा।
नाम्ना मेना मनोज्ञा वै पत्नी हिमवत: प्रिया॥ १५॥
अनुवाद
‘मेरु पर्वत की मनोहर कन्या मेना हिमवान की प्रिय पत्नी है। सुन्दर कटि वाली मेना उन दोनों कन्याओं की माता है।॥15॥
‘Mena, the charming daughter of Mount Meru, is the beloved wife of Himavan. Mena, who has a beautiful waist, is the mother of those two girls.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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