श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 35: विश्वामित्र आदि का गंगाजी के तट पर रात्रिवास करना, गंगाजी की उत्पत्ति की कथा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.35.14 
शैलेन्द्रो हिमवान् राम धातूनामाकरो महान्।
तस्य कन्याद्वयं राम रूपेणाप्रतिमं भुवि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! हिमवान नामक एक पर्वत है, जो सब पर्वतों का राजा है और सब प्रकार की धातुओं का विशाल भण्डार है। हिमवान की दो पुत्रियाँ हैं, जिनकी सुन्दरता इस पृथ्वी पर कहीं भी अद्वितीय है।॥14॥
 
‘Shri Ram! There is a mountain named Himavan, which is the king of all mountains and is a huge treasure of all kinds of metals. Himavan has two daughters, whose beauty is unmatched anywhere on this earth.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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