श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.32.3-4 
कुशाम्बं कुशनाभं च असूर्तरजसं १ वसुम्।
दीप्तियुक्तान् महोत्साहान् क्षत्रधर्मचिकीर्षया॥ ३॥
तानुवाच कुश: पुत्रान् धर्मिष्ठान् सत्यवादिन:।
क्रियतां पालनं पुत्रा धर्मं प्राप्स्यथ पुष्कलम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उनके नाम इस प्रकार हैं- कुशम्भ, कुशनाभ, असुरतर्जस और वसु। ये सभी तेजस्वी और अत्यंत उत्साही थे। राजा कुश ने 'प्रजा रक्षा' रूपी क्षत्रिय धर्म का पालन करने की इच्छा से अपने धर्मपरायण और सत्यनिष्ठ पुत्रों से कहा- 'पुत्रो! प्रजा का पालन करो, इससे तुम्हें धर्म का पूर्ण फल प्राप्त होगा।'
 
Their names are as follows – Kushambha, Kushanabha, Asurtarjas 2 and Vasu. All of them were bright and very enthusiastic. King Kusha, wishing to follow the Kshatriya religion in the form of ‘people protection’, said to his pious and truthful sons – ‘Sons! Follow the people, through this you will get the full fruits of religion. 3-4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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