श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.32.25 
स च ता दयिता भग्ना: कन्या: परमशोभना:।
दृष्ट्वा दीनास्तदा राजा सम्भ्रान्त इदमब्रवीत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अपनी परम सुन्दरी एवं प्रिय पुत्रियों को कुबड़ी होने के कारण अत्यन्त दयनीय अवस्था में देखकर राजा कुशनाभ भयभीत हो गए और इस प्रकार बोले-॥25॥
 
Seeing his most beautiful and beloved daughters in a very pitiable condition due to hunchback, king Kushanaabh became frightened and spoke thus -॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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