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श्लोक 1.32.17  |
चलं हि यौवनं नित्यं मानुषेषु विशेषत:।
अक्षयं यौवनं प्राप्ता अमर्यश्च भविष्यथ॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| 'विशेषतः मनुष्य शरीर में यौवन कभी स्थायी नहीं होता - वह प्रतिक्षण क्षीण होता रहता है। मुझसे सम्बन्ध स्थापित करने के पश्चात् तुम चिरयौवन प्राप्त करोगे और अमर हो जाओगे।'॥17॥ |
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| ‘Especially in the human body, youth is never permanent – it diminishes every moment. After having a relationship with me, you will attain eternal youth and become immortal.'॥ 17॥ |
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