Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.32.14: उसके शरीर के सभी अंग अत्यंत सुंदर थे। उसकी सुंदरता इस धरती पर कहीं भी बेजोड़ थी। उस बगीचे में आकर वह बादलों के पीछे छिपे तारों जैसी सुंदर लग रही थी। | ramayan सर्ग 1.32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ ताश्चारुसर्वाङ्गॺो रूपेणाप्रतिमा भुवि।
उद्यानभूमिमागम्य तारा इव घनान्तरे॥ १४॥
अनुवाद
उसके शरीर के सभी अंग अत्यंत सुंदर थे। उसकी सुंदरता इस धरती पर कहीं भी बेजोड़ थी। उस बगीचे में आकर वह बादलों के पीछे छिपे तारों जैसी सुंदर लग रही थी।
All her body parts were very beautiful. Her beauty was unmatched anywhere on this earth. Coming to that garden, she looked beautiful like the stars hidden behind the clouds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥