| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 1: बाल काण्ड » सर्ग 32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना » श्लोक 12-13 |
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| | | | श्लोक 1.32.12-13  | तास्तु यौवनशालिन्यो रूपवत्य: स्वलंकृता:।
उद्यानभूमिमागम्य प्रावृषीव शतह्रदा:॥ १२॥
गायन्त्यो नृत्यमानाश्च वादयन्त्यस्तु राघव।
आमोदं परमं जग्मुर्वराभरणभूषिता:॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | वे सब-की-सब सुन्दर सुन्दरता से विभूषित थीं। धीरे-धीरे यौवन ने आकर उनकी शोभा को और भी बढ़ा दिया। रघुवीर! एक दिन वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित होकर वे सब राजकुमारियाँ उस उद्यान में आईं और वर्षा ऋतु में चमकने वाली बिजली की लड़ियों के समान शोभायमान होने लगीं। सुन्दर आभूषणों से सुशोभित वे आँगन वहाँ गाती, खेलती और नाचती हुई महान् आनन्द और उल्लास में मग्न हो गईं॥12-13॥ | | | | All of them were adorned with beautiful beauty. Gradually youth came and enhanced their beauty even more. Raghuveer! One day, adorned with clothes and ornaments, all those princesses came to the garden and started looking beautiful like the strings of lightning that shine during the rainy season. Those courtyards, adorned with beautiful ornaments, got immersed in great fun and frolic there, singing, playing and dancing.॥12-13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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