श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 31: श्रीराम, लक्ष्मण तथा ऋषियों सहित विश्वामित्र का मिथिला को प्रस्थान तथा मार्ग में संध्या के समय शोणभद्र तट पर विश्राम  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.31.15 
स्वस्ति वोऽस्तु गमिष्यामि सिद्ध: सिद्धाश्रमादहम्।
उत्तरे जाह्नवीतीरे हिमवन्तं शिलोच्चयम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जाते समय उन्होंने वन देवताओं से कहा - 'मैं अपना यज्ञ पूर्ण करके इस सिद्धाश्रम से विदा ले रहा हूँ। गंगा के उत्तर तट से होता हुआ मैं हिमालय की घाटी में जाऊँगा। आप सबका कल्याण हो।'॥15॥
 
While leaving, he said to the forest deities - 'I am leaving this Siddhashrama after completing my yagya. Passing along the northern bank of the Ganga, I will go to the valley of the Himalayas. May you all be blessed.'॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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