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ramayan 1.30.3: ऐसा कहकर समस्त ऋषिगण युद्ध के लिए उत्सुक ककुत्स्थ वंश के उन दोनों राजकुमारों को देखकर अत्यन्त प्रसन्न हो गये और उन दोनों भाइयों की भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगे।   |   ramayan सर्ग 1.30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.30.3 
एवं ब्रुवाणौ काकुत्स्थौ त्वरमाणौ युयुत्सया।
सर्वे ते मुनय: प्रीता: प्रशशंसुर्नृपात्मजौ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर समस्त ऋषिगण युद्ध के लिए उत्सुक ककुत्स्थ वंश के उन दोनों राजकुमारों को देखकर अत्यन्त प्रसन्न हो गये और उन दोनों भाइयों की भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगे।
 
Having said this, all the sages became very happy looking at the two princes of the Kakutstha dynasty who were eager for war and started praising the two brothers profusely.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)