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ramayan 1.30.25: यज्ञ समाप्त होने पर महर्षि विश्वामित्र ने सम्पूर्ण दिशाओं को निर्विघ्न देखकर भगवान राम से कहा-॥25॥   |   ramayan सर्ग 1.30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.30.25 
अथ यज्ञे समाप्ते तु विश्वामित्रो महामुनि:।
निरीतिका दिशो दृष्ट्वा काकुत्स्थमिदमब्रवीत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ समाप्त होने पर महर्षि विश्वामित्र ने सम्पूर्ण दिशाओं को निर्विघ्न देखकर भगवान राम से कहा-॥25॥
 
After the sacrifice was over, the great sage Visvamitra, seeing all directions free from obstacles, said to Lord Rama -॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)