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ramayan 1.30.21: ‘अब मैं यज्ञमें विघ्न डालनेवाले इन अन्य क्रूर, दुराचारी, पापी और रक्तभक्षी राक्षसोंका भी संहार करता हूँ।’ 21॥   |   ramayan सर्ग 1.30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.30.21 
इमानपि वधिष्यामि निर्घृणान् दुष्टचारिण:।
राक्षसान् पापकर्मस्थान् यज्ञघ्नान् रुधिराशनान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘अब मैं यज्ञमें विघ्न डालनेवाले इन अन्य क्रूर, दुराचारी, पापी और रक्तभक्षी राक्षसोंका भी संहार करता हूँ।’ 21॥
 
‘Now I also kill these other cruel, evil-doing, sinful and blood-eating demons who are creating obstacles in the Yagya.’ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)