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ramayan 1.30.20: 'लक्ष्मण! देखो, मनु द्वारा प्रयुक्त शीतेषु नामक मानवास्त्र इस राक्षस को मूर्छित करके ले जा रहा है, किन्तु इसके प्राण नहीं ले रहा है।   |   ramayan सर्ग 1.30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.30.20 
पश्य लक्ष्मण शीतेषुं मानवं मनुसंहितम्।
मोहयित्वा नयत्येनं न च प्राणैर्वियुज्यते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'लक्ष्मण! देखो, मनु द्वारा प्रयुक्त शीतेषु नामक मानवास्त्र इस राक्षस को मूर्छित करके ले जा रहा है, किन्तु इसके प्राण नहीं ले रहा है।
 
'Lakshmana! Look, the human weapon called Sheeteshu used by Manu is knocking this demon unconscious and taking him away, but is not taking his life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)